EPFO Wage Limit Hike: ₹25000 हुई ईपीएफ वेतन सीमा , 51 लाख कर्मचारियों की खुली किस्मत! मिली मंजूरी

16 सितम्बर 2026, 8:49 अपराह्न IST

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EPFO Wage Limit Hike: नौकरीपेशा कर्मचारियों के लिए एक बेहद राहत भरी खबर सामने आई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में आयोजित हुई केंद्रीय कैबिनेट की बैठक में कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) से जुड़ा एक ऐतिहासिक निर्णय लिया गया है। सरकार ने अनिवार्य ईपीएफओ कवरेज के लिए तय मासिक वेतन सीमा (Wage Ceiling) को ₹15,000 से बढ़ाकर सीधे ₹25,000 प्रति माह करने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है।

केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कैबिनेट फैसलों की जानकारी देते हुए बताया कि लगभग 12 साल बाद यह बड़ा संशोधन किया गया है। सरकार के इस दूरगामी फैसले से देश भर के 51 लाख से ज्यादा नए कर्मचारी सीधे तौर पर अनिवार्य सामाजिक सुरक्षा के दायरे में शामिल हो सकेंगे।

12 साल बाद बदला गया नियम: क्या थी पुरानी व्यवस्था?

बता दें कि इससे पहले सितंबर 2014 में ईपीएफ की वेज लिमिट को ₹6,500 से बढ़ाकर ₹15,000 प्रति माह किया गया था। तब से लेकर अब तक कर्मचारियों की औसतन आय और मजदूरी में काफी बढ़ोतरी हो चुकी थी, लेकिन नियम वही बना हुआ था।

पुरानी व्यवस्था के तहत यदि कोई व्यक्ति ₹15,000 से अधिक की शुरुआती बेसिक सैलरी पर नौकरी शुरू करता था, तो वह अनिवार्य रूप से ईपीएफओ के दायरे में नहीं आता था। लेकिन अब ₹15,000 से ₹25,000 के बीच वेतन पाने वाले लाखों कर्मचारियों को भी कानूनन पीएफ, पेंशन और मुफ्त बीमा का सुरक्षा चक्र मिलेगा।

ईपीएफ वेज लिमिट बढ़ोतरी: मुख्य बातें एक नज़र में

विवरण / पहलूपहले की व्यवस्थाअब नया बदलाव / स्थिति
अनिवार्य ईपीएफ वेतन सीमा₹15,000 प्रति माह₹25,000 प्रति माह
नए लाभांवित कर्मचारी—51 लाख से अधिक अतिरिक्त कर्मचारी
मिलने वाले मुख्य लाभसीमित दायरे तकरिटायरमेंट फंड (EPF), पेंशन (EPS) व बीमा (EDLI)
अनुमानित सरकारी खर्च (वार्षिक)~₹10,250 करोड़~₹11,339 करोड़ (5 साल में ₹56,696 करोड़)
आधिकारिक कार्यान्वयन—मंत्रालय द्वारा वैधानिक प्रक्रिया जारी

कर्मचारियों और सरकार पर क्या पड़ेगा प्रभाव?

इस फैसले के लागू होने से केवल रिटायरमेंट के समय ही एक बड़ा फंड इकट्ठा नहीं होगा, बल्कि कर्मचारियों को ‘कर्मचारी पेंशन योजना’ (EPS) के तहत पेंशन सुरक्षा और ‘कर्मचारी डिपॉजिट लिंक्ड इंश्योरेंस’ (EDLI) के तहत मुफ्त जीवन बीमा की गारंटी भी मिलेगी।

दूसरी ओर, इस फैसले से सरकार का सालाना बजटीय खर्च बढ़कर लगभग ₹11,339 करोड़ हो जाएगा। हालांकि, सरकार का मानना है कि इससे संगठित (Formal) क्षेत्र के रोजगार को बढ़ावा मिलेगा, जिससे वर्कफ़ोर्स में स्थिरता आएगी और कर्मचारियों का भविष्य सुरक्षित हो सकेगा।

केंद्रीय कैबिनेट की मंजूरी के बाद अब श्रम एवं रोजगार मंत्रालय और ईपीएफओ जल्द ही इसका आधिकारिक नोटिफिकेशन जारी कर प्रशासनिक प्रक्रियाओं को पूरा करेंगे।

लेखक के बारे में

SHIVMANGAL

Senior Content Writer

मैं शिवमंगल वर्तमान में नौकरी दृष्टि में सीनियर कंटेंट राइटर के पोस्ट पर कार्यरत हु। वर्ष 2018 से शिक्षा के क्षेत्र में काम कर रहा हूं। मुझे सरकारी नौकरी , रिजल्ट आदि विषयों पर अपडेट देने का विशेष अनुभव है।
FIRST PUBLISHED: 16 सितम्बर 2026, 8:49 अपराह्न
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