BA, BSc और BCom डिग्रियां नहीं दिला पा रहीं नौकरी! नीति आयोग की रिपोर्ट में बड़ा खुलासा; जानें सुधार के 5 बड़े सुझाव

28 अगस्त 2026, 7:16 पूर्वाह्न IST

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NITI Aayog Report on Higher Education 2026: देश में बीए (BA), बीएससी (BSc) और बीकॉम (BCom) जैसी पारंपरिक डिग्रियां लंबे समय से उच्च शिक्षा का मुख्य आधार रही हैं। हर साल लाखों युवा इन कोर्सों में दाखिला लेते हैं। लेकिन हाल ही में नीति आयोग द्वारा जारी एक रिपोर्ट ने इन डिग्रियों और रोजगार (Jobs) के बीच बढ़ते अंतर को लेकर चौंकाने वाला खुलासा किया है। आयोग की रिपोर्ट के अनुसार, केवल डिग्री होना अब नौकरी मिलने की गारंटी नहीं रह गया है।

NITI Aayog की रिपोर्ट: ‘Reimagining Skilling for Viksit Bharat 2047’

नीति आयोग की रिपोर्ट ‘विकसित भारत 2047 के लिए स्किलिंग पर नए सिरे से विचार’ में देश की उच्च शिक्षा प्रणाली और आधुनिक लेबर मार्केट की जरूरतों के बीच एक बड़ा गैप (Gap) उजागर हुआ है।

  • पुराना सिलेबस बड़ी समस्या: रिपोर्ट के अनुसार, देश के अधिकांश कॉलेजों और विश्वविद्यालयों का पाठ्यक्रम (Syllabus) पुराना है, जो आधुनिक इंडस्ट्री की बदलती जरूरतों से मेल नहीं खाता।
  • इकोनॉमिक सर्वे के आंकड़े: इकोनॉमिक सर्वे के आंकड़ों के हवाले से बताया गया है कि देश में केवल 8.25 प्रतिशत ग्रेजुएट ही अपनी वास्तविक योग्यता और डिग्री के अनुरूप नौकरी कर पा रहे हैं।

2 करोड़ से ज्यादा छात्र पारंपरिक डिग्रियों पर निर्भर

रिपोर्ट में बताया गया है कि देश में अंडरग्रेजुएट (UG) प्रोग्राम में कुल 3.4 करोड़ छात्र पढ़ाई कर रहे हैं, जिनमें से 2 करोड़ से अधिक छात्र अकेले BA, BSc और BCom जैसे कोर्सों में नामांकित हैं –

  • BA प्रोग्राम: 1.13 करोड़ छात्र
  • BSc और BCom: लगभग 90 लाख से अधिक छात्र

अधिकांश युवा इन डिग्रियों में दाखिला केवल सरकारी नौकरी की न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता (Eligibility) पूरी करने के लिए लेते हैं। हालांकि, सरकारी नौकरियों की सीमित संख्या और प्राइवेट सेक्टर में व्यावहारिक ज्ञान की मांग के कारण करोड़ों युवाओं को स्नातक होने के बाद भी रोजगार के लिए कड़ा संघर्ष करना पड़ता है।

नीति आयोग ने दिए रोजगार सुधार के 5 मुख्य सुझाव

शिक्षा प्रणाली को जॉब-ओरिएंटेड (Job-Oriented) बनाने और छात्रों को रोजगार के योग्य बनाने के लिए नीति आयोग ने निम्नलिखित महत्वपूर्ण सिफारिशें की हैं:

  1. आधुनिक स्किल शामिल हों: सिलेबस में केवल किताबी ज्ञान देने के बजाय कोडिंग (Coding), डेटा एनालिसिस (Data Analysis), डिजिटल मार्केटिंग और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसे आधुनिक विषयों को शामिल किया जाए।
  2. इंडस्ट्री के अनुसार सिलेबस अपडेट: विश्वविद्यालयों को कंपनियों और इंडस्ट्री विशेषज्ञों के सहयोग से अपने पाठ्यक्रम को समय-समय पर अपडेट करना चाहिए।
  3. अनिवार्य इंटर्नशिप (Mandatory Internship): पढ़ाई के दौरान ही छात्रों को प्रैक्टिकल नॉलेज देने के लिए व्यावसायिक संस्थानों में इंटर्नशिप के अवसर बढ़ाए जाएं।
  4. Apprenticeship-Embedded Degree Programmes (AEDP): काम के साथ-साथ पढ़ाई वाले अप्रेंटिसशिप आधारित डिग्री प्रोग्राम को बड़े पैमाने पर लागू किया जाए, ताकि छात्र स्नातक होने के साथ ही कार्य अनुभव (Work Experience) भी प्राप्त कर सकें।
  5. वोकेशनल और स्किल-बेस्ड कोर्स: सामान्य डिग्रियों के साथ-साथ शॉर्ट-टर्म स्किल और वोकेशनल कोर्स को बढ़ावा दिया जाए।

निष्कर्ष

नीति आयोग की यह रिपोर्ट साफ संकेत देती है कि आने वाले समय में केवल डिग्री के आधार पर नौकरी पाना कठिन होगा। यदि छात्र BA, BSc या BCom जैसी डिग्रियां कर भी रहे हैं, तो उन्हें साथ में कोई न कोई आधुनिक प्रैक्टिकल स्किल और इंटर्नशिप का अनुभव अवश्य हासिल करना चाहिए, ताकि वे लेबर मार्केट की प्रतिस्पर्धा में खुद को साबित कर सकें।

लेखक के बारे में

SHIVMANGAL

Senior Content Writer

मैं शिवमंगल वर्तमान में नौकरी दृष्टि में सीनियर कंटेंट राइटर के पोस्ट पर कार्यरत हु। वर्ष 2018 से शिक्षा के क्षेत्र में काम कर रहा हूं। मुझे सरकारी नौकरी , रिजल्ट आदि विषयों पर अपडेट देने का विशेष अनुभव है।
FIRST PUBLISHED: 28 अगस्त 2026, 7:16 पूर्वाह्न
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