Old Pension Scheme: केंद्र सरकार के कर्मचारियों के बीच इन दिनों 8वें वेतन आयोग (8th Pay Commission) को लेकर चर्चाएं गर्म हैं। लेकिन सैलरी और भत्तों में बढ़ोतरी के अलावा जो मुद्दा सबसे ज्यादा ध्यान खींच रहा है, वह है—पुरानी पेंशन योजना (OPS) की वापसी की मांग। कर्मचारी संगठनों की स्पष्ट मांग है कि 8वें वेतन आयोग के तहत पुरानी पेंशन व्यवस्था को फिर से लागू किया जाए।
ऑल इंडिया एनपीएस इंप्लॉई फेडरेशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. मंजीत सिंह पटेल समेत कई कर्मचारी नेताओं का मानना है कि बुढ़ापे की असली सामाजिक सुरक्षा सिर्फ पुरानी पेंशन ही दे सकती है। दूसरी ओर, सरकार का तर्क है कि ओपीएस से देश के खजाने और अर्थव्यवस्था पर भारी वित्तीय बोझ पड़ता है। आइए आसान भाषा में समझते हैं कि आखिर ओपीएस और एनपीएस में क्या अंतर है और कर्मचारी ओपीएस की मांग पर क्यों अड़े हैं।
OPS vs NPS: दोनों पेंशन योजनाओं की सीधी तुलना
कर्मचारियों के लिए दोनों योजनाओं के फर्क को समझना बेहद जरूरी है। पुरानी पेंशन योजना जहाँ गारंटीड रिटर्न पर आधारित थी, वहीं एनपीएस मार्केट और जमा फंड (Corpus) पर टिकी है।
| मुख्य बिंदु / पहलू | पुरानी पेंशन योजना (OPS) | नेशनल पेंशन सिस्टम (NPS) |
|---|---|---|
| पेंशन का आधार | कर्मचारी की अंतिम बेसिक सैलरी का 50% गारंटीड। | जमा कुल कॉर्पस और मार्केट रिटर्न पर निर्भर। |
| कर्मचारी का योगदान | शून्य (गैर-अंशदायी / Non-contributory)। | सैलरी का 10% (सरकार 14% योगदान देती है)। |
| न्यूनतम सेवा शर्त | मात्र 10 साल की नौकरी के बाद पेंशन का अधिकार। | लंबी सेवा (30+ वर्ष) पर ही बेहतर कॉर्पस संभव। |
| महंगाई भत्ता (DA) | समय-समय पर बढ़ने वाले DA का सीधा लाभ। | बाजार के रिटर्न और एन्युटी पर आधारित। |
| जोखिम (Risk) | पूरी तरह सुरक्षित और सरकार द्वारा गारंटीड। | शेयर बाजार के उतार-चढ़ाव पर निर्भर (मार्केट लिंक्ड)। |
कर्मचारी क्यों कर रहे हैं OPS की मांग?
डॉ. मंजीत सिंह पटेल के अनुसार, ओपीएस को कर्मचारी इसलिए सबसे बेहतर मानते हैं क्योंकि इसमें अनिश्चितता के लिए कोई जगह नहीं थी। उदाहरण के तौर पर, यदि किसी कर्मचारी की आखिरी बेसिक सैलरी ₹60,000 थी, तो ओपीएस में उसे बिना किसी कटौती के सीधे ₹30,000 मासिक पेंशन मिलती थी—फिर चाहे शेयर बाजार का हाल कैसा भी हो।
इसके विपरीत, एनपीएस में मिलने वाली पेंशन इस बात पर तय होती है कि 20-25 सालों में कितना फंड जमा हुआ। अगर किसी वजह से कर्मचारी की नौकरी कम साल की रही या उसे जल्दी रिटायरमेंट लेना पड़ा, तो उसका कॉर्पस कम बनेगा और पेंशन भी काफी मामूली मिलेगी।
आकस्मिक स्थिति में पेंशन का विकल्प
एनपीएस के मौजूदा नियमों के तहत यदि किसी कर्मचारी की सेवा के दौरान मृत्यु हो जाती है या वह दिव्यांग हो जाता है, तो उसके पास दो विकल्प होते हैं।
- ओपीएस का लाभ: कर्मचारी अपना जमा हिस्सा ब्याज सहित वापस लेकर पुरानी पेंशन योजना के तहत अंतिम बेसिक सैलरी का 50% + डीए (DA) पा सकता है।
- एनपीएस का लाभ: कुल जमा कॉर्पस का 20% नकद निकालकर बाकी 80% हिस्सा बैंक/एन्युटी में निवेश कर एनपीएस के आधार पर पेंशन ले सकता है।
8वें वेतन आयोग से क्या हैं उम्मीदें?
कर्मचारी संगठनों का तर्क है कि पेंशन कोई व्यापार या निवेश का साधन नहीं, बल्कि जीवन भर देश की सेवा करने वाले कर्मचारी के बुढ़ापे की ‘सोशल इनकम सिक्योरिटी’ है। उनका सवाल है कि यदि कोई कर्मचारी 30-40 साल तक बेदाग सेवा देता है, तो उसकी पेंशन को बाजार के भरोसे छोड़ना न्यायसंगत नहीं है। इसी सुरक्षा और गारंटी को वापस पाने के लिए कर्मचारी 8वें वेतन आयोग में ओपीएस की पूर्ण बहाली की पुरजोर मांग कर रहे हैं।
