TET Pass Deadline Fixed: पश्चिम बंगाल के स्कूली शिक्षा जगत में इन दिनों काफी हलचल मची हुई है। लंबे समय से सेवारत शिक्षकों की योग्यता को लेकर चल रही खींचतान के बीच राज्य सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है। सुप्रीम कोर्ट की सख्त हिदायत के बाद पश्चिम बंगाल स्कूल शिक्षा विभाग ने साफ कर दिया है कि आरटीई (RTE) कानून 2009 लागू होने से पहले नियुक्त हुए प्राथमिक शिक्षकों के लिए भी शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) पास करना अनिवार्य होगा।
राज्य सरकार ने इसके लिए वेस्ट बंगाल सेंट्रल स्कूल सर्विस कमीशन (WBSSC) और वेस्ट बंगाल बोर्ड ऑफ प्राइमरी एजुकेशन को परीक्षा आयोजन की तैयारियां शुरू करने के निर्देश दे दिए हैं।
एक नज़र में: पश्चिम बंगाल सेवारत शिक्षक TET अनिवार्यता
मामले की गंभीरता और नई समय-सीमा से जुड़े मुख्य बिंदु नीचे दी गई टेबल में देखे जा सकते हैं।
| विवरण | महत्वपूर्ण जानकारी |
|---|---|
| प्रभावित शिक्षकों की संख्या | लगभग 90,000 शिक्षक (कक्षा 1 से 8वीं तक) |
| टीईटी पास करने की अंतिम तिथि (Deadline) | 31 अगस्त 2028 |
| परीक्षा आयोजन की आवृत्ति | वर्ष में कम से कम 2 बार (हर 6 महीने के अंतराल पर) |
| छूट का मानदंड | जिनकी सेवा अवधि 5 वर्ष या उससे कम बची है |
| परीक्षा कराने वाली संस्थाएं | WBSSC और वेस्ट बंगाल बोर्ड ऑफ प्राइमरी एजुकेशन |
क्यों पड़ी TET अनिवार्य करने की जरूरत?
यह पूरा मामला सुप्रीम कोर्ट के एक महत्वपूर्ण फैसले से जुड़ा हुआ है। उत्तर प्रदेश से जुड़े ‘अंजुमन इशात-ए-तालीम ट्रस्ट’ मामले में सुनवाई करते हुए अदालत ने स्पष्ट किया था कि गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सुनिश्चित करने के लिए आरटीई लागू होने से पहले नियुक्त शिक्षकों को भी पात्रता परीक्षा देनी होगी।
हालांकि, कोर्ट ने रिव्यू ऑर्डर के तहत शिक्षकों को राहत देते समयसीमा को दो साल से बढ़ाकर तीन साल कर दिया था। इसी आधार पर बंगाल सरकार ने अब 31 अगस्त 2028 की अंतिम तारीख तय की है।
किन शिक्षकों को मिली है छूट और किनकी बढ़ेगी टेंशन?
अधिसूचना के मुताबिक, बंगाल में पहली से आठवीं कक्षा तक पढ़ा रहे करीब 90,000 शिक्षक इसके दायरे में आ सकते हैं। लेकिन राहत की बात यह है कि यह नियम सब पर एक समान लागू नहीं होगा।
- किन्हें मिलेगी राहत: जिन शिक्षकों की रिटायरमेंट (सेवा अवधि) में केवल 5 साल या उससे कम का समय बचा है, उन्हें इस परीक्षा से पूरी तरह छूट दी गई है।
- किनके लिए अनिवार्य: ऐसे सभी शिक्षक जिनकी सेवा अवधि 5 वर्ष से अधिक बाकी है, उन्हें 2028 तक TET पास करना ही होगा।
साल में 2 बार आयोजित होगी परीक्षा
शिक्षकों पर अचानक दबाव न पड़े, इसके लिए सुप्रीम कोर्ट ने राज्यों को निर्देश दिया है कि टीईटी की परीक्षा साल में कम से कम दो बार (हर छह महीने के अंतराल में) आयोजित की जाए। इससे शिक्षकों को अपनी तैयारी सुधारने और परीक्षा पास करने के कई मौके मिल सकेंगे।
दूसरी ओर, बंगाल के कई शिक्षक संगठनों ने इस फैसले पर कड़ा विरोध जताया है। उनका तर्क है कि दशकों की सेवा के बाद दोबारा परीक्षा देना शिक्षकों के अनुभव का अपमान है। हालांकि, सरकारी अधिसूचना और अदालती आदेश के बाद अब शिक्षकों को 2028 की डेडलाइन को ध्यान में रखकर तैयारी शुरू करनी होगी।
