UP Teacher Big News: पुरानी नियमावली से नहीं होगी शिक्षक भर्ती, इलाहाबाद हाई कोर्ट का बड़ा फैसला

2 सितम्बर 2026, 10:38 पूर्वाह्न IST

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UP Teacher Big News: उत्तर प्रदेश के शिक्षण संस्थानों में शिक्षक भर्ती की तैयारी कर रहे अभ्यर्थियों के लिए एक बेहद महत्वपूर्ण कानूनी फैसला सामने आया है। इलाहाबाद हाई कोर्ट ने सहायता प्राप्त जूनियर हाईस्कूलों में सहायक अध्यापकों की भर्ती प्रक्रिया को लेकर एक बड़ा आदेश सुनाया है। अदालत ने स्पष्ट कर दिया है कि यदि कोई सहायता प्राप्त जूनियर हाईस्कूल आगे चलकर हाईस्कूल या इंटरमीडिएट कॉलेज के रूप में अपग्रेड (उच्चीकृत) हो जाता है, तो वह अपनी पुरानी और अलग जूनियर हाईस्कूल वाली कानूनी पहचान खो देता है। ऐसे में वहां खाली होने वाले पदों पर साल 1978 की पुरानी भर्ती नियमावली लागू नहीं की जाएगी।

35 विशेष अपीलों पर हाई कोर्ट की खंडपीठ ने सुनाया फैसला

यह ऐतिहासिक फैसला न्यायमूर्ति सौमित्र दयाल सिंह और न्यायमूर्ति अरुण कुमार की दोहरी खंडपीठ ने प्रदीप कुमार सिंह एवं 35 अन्य याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए दिया। यह पूरा विवाद 3 नवंबर 2025 को जारी हुए सहायक अध्यापक भर्ती विज्ञापन से जुड़ा हुआ है। उस समय 600 सहायता प्राप्त जूनियर हाईस्कूलों में 1262 पदों पर भर्ती निकाली गई थी। वर्ष 2021 की परीक्षा में सफल अभ्यर्थियों ने इसमें आवेदन किया और काउंसलिंग भी पूरी कर ली थी। हालांकि, 19 फरवरी 2026 को एकल पीठ द्वारा दिए गए फैसले के आधार पर अपग्रेड हो चुके संस्थानों की सीटों को हटा दिया गया, जिससे कुल पदों की संख्या घटकर 634 रह गई।

माध्यमिक ढांचे में आने के बाद पुरानी पहचान नहीं रहती कायम

खंडपीठ ने सुनवाई के दौरान सख्त लहजे में कहा कि एक बार जब किसी जूनियर हाईस्कूल को हाईस्कूल या इंटरमीडिएट कॉलेज के रूप में मान्यता मिल जाती है, तो पूरा संस्थान माध्यमिक शिक्षा के वैधानिक दायरे में आ जाता है। केवल इस आधार पर कि वहां कक्षा 8 तक की पढ़ाई चल रही है या वह कभी जूनियर हाईस्कूल था, उसकी पुरानी कानूनी पहचान बनी नहीं रह सकती। वेतन भुगतान अधिनियम 1978 केवल तात्कालिक वेतन सुरक्षा देता है, इसका यह मतलब बिल्कुल नहीं है कि भविष्य की खाली सीटों पर भी पुरानी नियमावली चलती रहेगी।

‘गेम के नियम बदलने’ वाली अभ्यर्थियों की दलील खारिज

सुनवाई के दौरान अभ्यर्थियों ने सुप्रीम कोर्ट के फैसलों का हवाला देते हुए तर्क दिया था कि भर्ती प्रक्रिया शुरू होने के बाद बीच में नियम नहीं बदले जा सकते (Rules of the Game Cannot be Changed)। हाई कोर्ट की खंडपीठ ने इस दलील को सिरे से खारिज कर दिया। अदालत ने कहा कि यहाँ अभ्यर्थियों की योग्यता, कटऑफ या चयन प्रक्रिया का नियम नहीं बदला गया है, बल्कि केवल उन गलत रिक्तियों को हटाया गया है जिन्हें पुरानी नियमावली से भरा ही नहीं जा सकता था।

काउंसलिंग या चयन सूची में नाम आना नियुक्ति का पक्का अधिकार नहीं

हाई कोर्ट ने 19 फरवरी 2026 के एकल पीठ के आदेश और उसके बाद जारी 9 मार्च तथा 15 मार्च 2026 की अधिसूचनाओं को सही ठहराते हुए अभ्यर्थियों की सभी अपीलें खारिज कर दीं। कोर्ट ने साफ किया कि परीक्षा पास करना, काउंसलिंग में शामिल होना या अस्थायी चयन सूची में नाम आ जाना किसी अभ्यर्थी को नियुक्ति का अंतिम और अटल अधिकार नहीं देता है। हालांकि, जो स्कूल 3 नवंबर 2025 तक अपग्रेड नहीं हुए थे और केवल जूनियर हाईस्कूल ही थे, उनकी रिक्तियों पर इस फैसले का कोई असर नहीं पड़ेगा।

Disclaimer: देख जानकारी मेडिकल रिपोर्ट्स पर आधारित है जानकारी की पुष्टि और अधिक जानकारी के लिए ऑफिसियल आदेश जरूर पढ़ें।

लेखक के बारे में

SHIVMANGAL

Senior Content Writer

मैं शिवमंगल वर्तमान में नौकरी दृष्टि में सीनियर कंटेंट राइटर के पोस्ट पर कार्यरत हु। वर्ष 2018 से शिक्षा के क्षेत्र में काम कर रहा हूं। मुझे सरकारी नौकरी , रिजल्ट आदि विषयों पर अपडेट देने का विशेष अनुभव है।
FIRST PUBLISHED: 02 सितम्बर 2026, 10:38 पूर्वाह्न
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