UP Teacher Good News: उत्तर प्रदेश के परिषदीय प्राथमिक व उच्च प्राथमिक विद्यालयों में कार्यरत शिक्षकों के लिए बेसिक शिक्षा विभाग ने ‘विशेष टीईटी’ को लेकर फैली सभी भ्रांतियों और असमंजस की स्थिति को पूरी तरह साफ कर दिया है। विभाग ने स्पष्ट किया है कि जिन शिक्षकों ने पूर्व में अध्यापक पात्रता परीक्षा (TET) या केंद्रीय अध्यापक पात्रता परीक्षा (CTET) उत्तीर्ण कर ली है, उन्हें इस विशेष टीईटी में शामिल होने की कोई आवश्यकता या अनिवार्यता नहीं है।
यह विशेष परीक्षा केवल उन्हीं अध्यापकों के लिए आयोजित की जा रही है जो अब तक टीईटी परीक्षा पास नहीं कर सके हैं। आगामी 3 नवंबर 2026 को आयोजित होने वाली इस परीक्षा के लिए आवेदन प्रक्रिया शुरू हो चुकी है।
Special TET 2026: एक नज़र में मुख्य स्थिति
| विवरण | संबंधित जानकारी |
|---|---|
| आयोजनकर्ता विभाग | बेसिक शिक्षा विभाग, उत्तर प्रदेश |
| परीक्षा की तिथि | 03 नवंबर 2026 |
| किनके लिए अनिवार्य है? | केवल उन शिक्षकों के लिए जो अब तक TET/CTET पास नहीं हैं |
| किनके लिए छूट है? | जो शिक्षक पूर्व में ही TET या CTET पास कर चुके हैं |
| लक्ष्य | परिषदीय शिक्षक और दिव्यांग बच्चों को पढ़ाने वाले विशेष शिक्षक |
सुप्रीम कोर्ट का निर्देश और शिक्षकों का गणित
सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुपालन में परिषदीय स्कूलों के कुल 1.42 लाख शिक्षकों के लिए टीईटी पास करना अनिवार्य किया गया था। इनमें से एक बड़ी संख्या में शिक्षक पहले ही आयोजित परीक्षाओं के माध्यम से टीईटी उत्तीर्ण कर चुके हैं।
| श्रेणी (Teacher Status) | शिक्षकों की कुल संख्या | स्थिति / नियम |
|---|---|---|
| कुल लक्षित शिक्षक | ~1,42,000 | सुप्रीम कोर्ट के आदेशानुसार TET पास करना अनिवार्य |
| पूर्व में TET/CTET पास शिक्षक | ~86,000 | विशेष टीईटी से पूरी तरह छूट (दोबारा परीक्षा नहीं देनी) |
| शेष बिना TET वाले शिक्षक | 56,818 | विशेष टीईटी देना और पास करना बेहद अनिवार्य |
बीएसए (BSA) के माध्यम से होगा शत-प्रतिशत पंजीयन
अपर मुख्य सचिव (बेसिक व माध्यमिक शिक्षा) पार्थ सारथी सेन शर्मा की ओर से जारी निर्देशों में महानिदेशक (स्कूल शिक्षा) और निदेशक (बेसिक शिक्षा) को सख्त आदेश दिए गए हैं। सभी जिलों के बेसिक शिक्षा अधिकारियों (BSA) को जिम्मेदारी सौंपी गई है कि वे अपने जिले के बचे हुए सभी 56,818 गैर-टीईटी शिक्षकों का अनिवार्य रूप से इस विशेष टीईटी में पंजीकरण कराएं और उन्हें परीक्षा में शामिल कराएं।
विभाग ने स्पष्ट किया है कि यह कदम सुप्रीम कोर्ट के मानकों को पूरा करने और परिषदीय विद्यालयों तथा दिव्यांग बच्चों को पढ़ाने वाले विशेष शिक्षकों की अर्हता को समय से सुनिश्चित करने के लिए उठाया गया है।
